मथुरा वृन्दावन मार्ग को द्वापर युग जैसा वातावरण देने एवं प्रदूषण मुक्त कराने के लिए बनाया गया कदम्ब पथ
मथुरा: मथुरा वृन्दावन मार्ग को प्रदूषण मुक्त बनाने एव वृन्दावन जाने वाले तीर्थ यात्रियों को द्वापर युग जैसा वातावरण देने के लिए इस मार्ग को कदम्ब के वृक्षों से आच्छादित करने का काम शुरू हो गया है।
मथुरा वृन्दावन के बीच रोज सैकड़ो सरकारी और निजी वाहन चलने से वातावरण प्रदूषित हो जाता है। कदम्ब का वृक्ष पर्यावरण हितैषी माना गया है। इसको ध्यान में रखते हुये मथुरा और वृन्दावन के बीच कदम्ब के 400 पौधों का रोपण समाजसेवियों, संतो द्वारा किया गया है।
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बताया कि इन पौधों को पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से उपलब्ध कराया गया वहीं ट्री-गार्ड उदारमना समाजसेवियों द्वारा उपलब्ध कराया गया। सभी पौधों को पौधारोपण के साथ साथ ट्री-गार्ड से सुरक्षित करना सुनिश्चित किया गया। प्रयास यह किया गया है कि मथुरा वृन्दावन के बीच चलनेवाले करोड़ो तीर्थयात्रियों को द्वापर की अनुभूति कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि इन पौधों का जीवन सुनिश्चित करने के लिए इनकी जिम्मेदारी नगर निगम , समाजसेवियों एवं पर्यावरणप्रेमियों एवं आसपास के ग्रामीणों को दी जाएगी।
उधर वृन्दावन के प्रतिष्ठित चतुः सम्प्रदाय के अध्यक्ष संत फूलडोल महराज ने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास है क्योंकि द्वापर में कान्हा ने कदम्ब के वृक्ष के नीचे वंशी बजाकर राधारानी और उनकी सखियों को बुलाकर महारास किया था। यह स्थल आज भी कदमखण्डी के नाम से मशहूर है। उन्होंने संस्कृत का श्लोक ‘आई जगदम्बा मद-अम्बा कदम्बा, वन प्रियवासिनी , हसा राते’ पढ़कर कहा कि कदम्ब के वृक्ष में मां जगदम्बा का वास होता है।
वैद्य श्यामबिहारी का कहना है कि कदम्ब का वृक्ष एक औषधीय वृक्ष है तथा इसकी छाल से बनी दवा से पाचन शक्ति बढ़ जाती है तो एक इत्र विक्रेता ने बताया कि कदम्ब के फूलों का प्रयोग इत्र बनाने में किया जाता है।
किशोरी रमण महाविद्यालय के प्राचार्य जाने माने पर्यावरणविद प्रवीन अग्रवाल के अनुसार कदम्ब का वृक्ष पर्यावरण हितैषी है तथा इसका उपयोग पर्यावरण को बेहतर बनानेे के लिए किया जाता है। मथुरा वृन्दावन के बीच कदम्ब पथ बनाने से इस मार्ग पर चलनेवाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।
जाने माने चिकित्सक डा शैलेन्द्र मिश्र का कहना था कि इसकी छाल का उपयोग जहां ब्ल शुगर के लेविल को कम करता है वहीं इसका उपयोग घाव को ठीक करने मे भी होता है। कुल मिलाकर इन पौधोें केे कदम्ब केे वृक्ष के रूप में विकसित होने पर कदम्ब पथ मनोहारी हरीतिमा युक्त्त बनने की उम्मीद की जाती है।












