पाली में बढ़ता जल और वायु प्रदूषण: ग्राउंड विजिट में खुली उद्योगों की हकीकत
- पाली के औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की भयावह तस्वीर
- पाली में जल और वायु प्रदूषण का गंभीर संकट
- पाली प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी उद्योग बेखौफ
- जोधपुर में भी बासनी में खुले में कचरा पड़ा दिखा, सीवर में गंदा पानी जाम हालत में दिखा
- आबू रोड और वासड़ा के औद्योगिक इलाकों में भी औद्योगिक प्रदूषण देखने मिला
पाली एक बार फिर गंभीर पर्यावरणीय संकट के बीच चर्चा में है। वस्त्र, रंगाई-छपाई और अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित अपशिष्ट जल जहां नदियों, नालों और भूजल को प्रभावित कर रहा है, वहीं उद्योगों से निकलने वाला धुआं, रासायनिक गैसें और जहरीले उत्सर्जन क्षेत्र की हवा को भी खतरनाक बना रहे हैं। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट पर्यावरण संरक्षण के मामलों में लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।
हाल ही में पर्यावरण टुडे की टीम ने पाली के औद्योगिक क्षेत्रों का ग्राउंड विजिट किया, जहां खुली आंखों से जल और वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति देखने को मिली। टीम ने कई स्थानों पर दूषित पानी के बहाव, नालों में औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण और आसपास के क्षेत्रों में तेज रासायनिक दुर्गंध व धुएं की स्थिति का अवलोकन किया। यह दृश्य यह दर्शाने के लिए पर्याप्त था कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन कई जगहों पर प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है।
पाली में वर्षों से औद्योगिक अपशिष्ट जल के कारण भूजल, सतही जल और कृषि भूमि प्रभावित होती रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ उद्योग अब भी बिना समुचित उपचार के दूषित पानी का निस्तारण कर रहे हैं। इसके साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं और गैसें वायु गुणवत्ता को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल प्रदूषण के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। हवा में रासायनिक कण, दुर्गंध और विषैले तत्व आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहे हैं। सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायतें बढ़ रही हैं।
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सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय पर्यावरणीय उल्लंघनों पर कठोर आदेश दे चुका है, तब भी यदि उद्योग प्रदूषण फैलाने से नहीं रुक रहे, तो यह कानून और न्यायिक आदेशों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल नोटिस और चेतावनी पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है नियमित निरीक्षण, कठोर मॉनिटरिंग और दोषी उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
पाली की यह स्थिति केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक तंत्र के लिए चेतावनी है। यदि पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया, तो इसका असर समाज, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों पर गंभीर रूप से पड़ेगा।
पाली के औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की भयावह तस्वीर
पाली में दिखाई गई कुछ तस्वीरें ऊपर दी गई स्थिति की गवाही देती हैं..



जोधपुर में भी बासनी में खुले में कचरा पड़ा दिखा, सीवर में गंदा पानी जाम हालत में दिखा
जोधपुर में भी पर्यावरण टुडे की टीम को ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। वहां भी न्यू इंडस्ट्रियल एरिया फेज 2 बासनी में खुले में कचरा पड़ा दिखा। सीवर में गंदा पानी जाम हालत में दिखा। यहां, ज़मीन पर फैल रहे प्रदूषण के परेशान करने वाले नज़ारे दिखे। दूसरी तरफ, हवा में प्रदूषण भी बहुत ज़्यादा देखने को मिला। जोधपुर के हेवी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में भी फैक्ट्रियों से काला धुआं निकलने के नज़ारे दिखे। यहां दिखाई गई कुछ तस्वीरें ऊपर दी गई स्थिति की गवाही देती हैं।



आबू रोड और वासड़ा के औद्योगिक इलाकों में भी औद्योगिक प्रदूषण देखने मिला
सिर्फ़ पाली और जोधपुर ही नहीं, इंडस्ट्रियल प्रदूषण के राक्षस ने आबू रोड और वासड़ा की प्रकृति को भी जकड़ लिया है। पर्यावरण टुडे की टीम को आबू रोड और वासड़ा के औद्योगिक इलाकों में भी औद्योगिक प्रदूषण देखने मिला। यहाँ कचरे के ढेर जल रहे थे और उनसे ज़हरीला धुआँ निकल रहा था। जो आस-पास फैल रहा था और पेड़ों और पत्तियों को नुकसान पहुँचा रहा था। कहीं-कहीं राख के ढेर भी दिखे। यहां दिखाई गई कुछ तस्वीरें ऊपर दी गई स्थिति की गवाही देती हैं।


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