अब समय आ गया है कि हम यह विचार करें कि भावी पीढ़ी को प्लास्टिक युक्त रखना है या प्लास्टिक मुक्तઃ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विचार ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ को जनआंदोलन बनाकर साकार करने का आह्वान किया
प्रकृति से विमुख होकर पर्यावरण की कीमत पर विकास नहीं हो सकता, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण अनुकूल विकास की अवधारणा दी है : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण से संबंधित 11 विभिन्न परियोजनाओं का वर्चुअल तरीके से लोकार्पण, शिलान्यास और ई-लॉन्च किया
गांधीनगर: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गुरुवार को गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए विचार ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ को जनआंदोलन बनाकर साकार करने का आह्वान किया।
वन एवं पर्यावरण विभाग और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज मंत्री मुळुभाई बेरा तथा राज्य मंत्री मुकेशभाई पटेल विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विश्व पर्यावरण दिवस को केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि सभी के लिए ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ करने के संकल्प का दिवस बताते हुए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देशभर में पिछले 15 दिनों से चल रहे ‘वन नेशन, वन मिशन – प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ अभियान का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से विमुख होकर पर्यावरण की कीमत पर विकास नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण के संरक्षण के साथ सतत विकास की अवधारणा दी है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ‘पौधे में परमात्मा’ देखने की हमारी संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की भावना आदिकाल से रही है। इस संदर्भ में उन्होंने अहमदाबाद में सिंदूर वन और गांधीनगर स्थित सचिवालय प्रांगण में 4000 पौधे लगाकर मातृवन के निर्माण के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान शुरू करने की भी जानकारी दी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक के सहज उपयोग से बढ़ रहे पर्यावरणीय जोखिम को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्लास्टिक मानव जाति के प्रभावशाली आविष्कारों में से एक है और यह हमारी जीवनशैली का एक हिस्सा बन गया है। लेकिन सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण और भावी पीढ़ी के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि हम इस बारे में सोचें कि आने वाली पीढ़ी को प्लास्टिक युक्त रखना है या प्लास्टिक मुक्त। एक समझदार नागरिक और सभ्य समाज के तौर पर हमें प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और भविष्य के जोखिमों को समझने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस-2025 से शुरू किए गए ‘ग्रीन वॉल ऑफ अरवल्ली प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत राज्य सरकार ने अरवल्ली, बनासकांठा, साबरकांठा, मेहसाणा, पंचमहाल, महीसागर और दाहोद सहित सात जिलों के 19,225 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे लगाने का आयोजन किया है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस से प्रधानमंत्री ने रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल और रिकवर यानी चार ‘आर’ के साथ पर्यावरण की रक्षा का मंत्र दिया है। नरेन्द्र मोदी ऐसे विजनरी लीडर हैं, जिन्होंने हमेशा देश और दुनिया को हमेशा पर्यावरण रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन की अनूठी राह दिखाई है। प्रधानमंत्री ने देश को रिन्यूएबल एनर्जी के लिए ‘वन सन, वन अर्थ’, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए ‘नेट जीरो’, पर्यावरण अनुकूल विकास के लिए ‘ग्रीन ग्रोथ’ और धरती माता को हरा-भरा बनाने के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे एक नई दिशा दिखाने वाले सफल प्रयोग दिए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बरसाती पानी को जमीन में उतारकर जल संचयन के लिए ‘कैच द रेन’ और ‘मिशन लाइफ’ के माध्यम से हमारे रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा का विचार भी दिया है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में विभिन्न स्थलों पर लगाई गई क्लॉथ बैग वेंडिंग मशीन और प्लास्टिक बोतल क्रशर मशीन का उल्लेख करते हुए लोगों से कपड़े की थैली का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कपड़े की थैली का उपयोग करने और पानी के लिए स्टील की बोतल रखने जैसे छोटे-छोटे प्रयास कर और ऐसी अच्छी आदतें विकसित कर हमें स्वयं ही परिवर्तन की शुरुआत करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की शानदार सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश की सेना को पूरे गुजरात की ओर से बधाई देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए प्रधानमंत्री ने दुनिया के समक्ष आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की भारत की नीति को स्पष्ट कर दिया है। अब इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस पर उन्होंने ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ के संकल्प से भारत को प्लास्टिक प्रदूषण मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की है।
विश्व पर्यावरण दिवस का यह उत्सव प्रकृति के प्रति हमारे समर्पण भाव को दिखाता है : मुळुभाई बेरा, वन एवं पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज मंत्री
वन एवं पर्यावरण तथा क्लाइमेट चेंज मंत्री मुळुभाई बेरा ने ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के उपलक्ष्य में शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आज का दिन संकल्प का, संरक्षण का और संवेदना का है। विश्व पर्यावरण दिवस 2025 की थीम ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ तय की गई है। वेद काल से हम प्रकृति की पूजा करते आए हैं। हमारे वेदों में जल संरक्षण से संबंधित मंत्र हैं। हम तो ‘छोडमां रणछोड’ (पौधे में परमात्मा) के दर्शन करते हैं। श्रीमद् भगवद् गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, “वृक्षों में मैं पीपल हूँ, प्राणियों में मैं सिंह हूँ।” आज भी हमारी माताएँ-बहनें वट सावित्री के व्रत में बरगद की पूजा करते हैं। भारत में प्रकृति तथा संस्कृति के बीच अटूट नाता है। हमारी प्रकृतिमय संस्कृति हमारी विशेष विशिष्टता है।

मुळुभाई बेरा ने कहा कि आज के दिन का उत्सव प्रकृति के प्रति हमारे समर्पण को दर्शाता है। यह दिन हमारे विचारों में परिवर्न लाने तथा हमारी कार्यशैली में बदलाव लाने का स्वर्णिम अवसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से हम पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ‘मिशन लाइफ’, ‘मिष्टी योजना’ तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे विभिन्न आयामों के जरिये जन-जन को पर्यावरण जतन के लिए जागृत करने में हम सफल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिक सुविधाएँ आज पर्यावरण के लिए जोखिम बन गई हैं। इनमें सर्वाधिक हानिकारक है – सिंगल यूज प्लास्टिक। यह प्लास्टिक जब जमीन में जाता है, तब जमीन को अनुपजाऊ (बंजर) बना देता है; जब पानी में जाता है, तब नदियों तथा समुद्री जीवसृष्टि को मार डालता है और जब कूड़े में जा मिलता है, तब माइक्रो प्लास्टिक के रूप में पुनः हमारे भोजन तक पहुंच जाता है। ऐसे प्लास्टिक प्रदूषण के निवारण के लिए राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। इनमें प्लास्टिकमुक्त अभियान अंतर्गत वन क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों तथा स्कूली स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों, प्लास्टिक के विकल्पों को लेकर जनजागृति अभियान चलाए जा रहे हैं।
इसके अनुसंधान में वन एवं पर्यावरण तथा क्लाइमेट चेंज मंत्री ने कहा कि प्लास्टिक मैनेजमेंट की ओर हमने अनेक ठोस पहलें की हैं। जीपीसीबी के नेतृत्व में 646 प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट, 7 वेस्ट टु एनर्जी प्लांट तथा 5 को-प्रोसेसिंग सीमेंट प्लांट कार्यरत हैं। रिवर्स वेंडिंग मशीनों, कपड़े की थैलियों के लिए एटीएम, पर्यावरणानुकूल प्रसाद बॉक्स जैसे नवीनतम कदम परयावरण संरक्षण की ओर परिवर्तन लाने में सहायता करेंगे।
सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प अपनाने में गुजरात सदैव अग्रसर : मुकेश पटेल, राज्य मंत्री
विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएँ देते हुए वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री मुकेश पटेल ने कहा कि आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ तथा ‘मातृत्व वन’ में पौधारोपण कर इस अभियान की राज्यव्यापी शुरुआत कराई है। गत वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अंतर्गत 17.50 करोड़ पेड़-पौधे लगाए गए थे, जिसमें गुजरात समग्र देश में दूसरे क्रम पर है।

मुकेश पटेल ने आगे कहा कि प्लास्टिक से आज नागरिक प्रभावित हैं। भोजन में भी अब प्लास्टिक के अंश देखने को मिलते हैं। गत 22 मई से राज्य में पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम अंतर्गत 1.5 लाख से अधिक नागरिकों ने 2,500 से अधिक कार्यक्रमों के आयोजन किए। इनमें बीच क्लीनिंग, गार्डन क्लीनिंग जैसे कार्यक्रमों द्वारा 6 लाख किलो से अधिक प्लास्टिक कूड़ा एकत्र कर उसका निस्तारण किया गया है।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्लास्टिक के रीसाइकल व रीयूज से जुड़े विभिन्न इनोवेशन-स्टार्टअप्स के प्रदर्शनी स्टॉल का निरीक्षण कर इनोवेटर्स को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर ‘गुजरात में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की बेस्ट प्रैक्टिसेज’, ‘एक पेड़ मां के नाम’ तथा ‘विश्व पर्यावरण दिवस का प्री-कैम्पेन’ विषय पर डॉक्यूमेंटरी फिल्म प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में सूरत में एफ्लुएंट ट्रेडिंग के लिए सीईपीटी (सेप्ट) तथा उसकी सदस्य इकाइयों के बीच रणनीतिक समझौते करार-एमओयू मुख्यमंत्री की उपस्थिति में किए गए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा कुल लगभग 11 विभिन्न परियोजनाओं का वर्चुअली लोकार्पण, शिलान्यास एवं ई-लॉन्च किया गया।

इस अवसर पर गांधीनगर उत्तर की विधायक रीटाबेन पटेल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एम. के. दास, जीपीसीबी के अध्यक्ष आर. बी. बारड, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार, सचिव आर. सी. मीणा, म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटिव कमिशनर रेम्या मोहन, हेड ऑफ द फॉरेस्ट डॉ. ए. पी. सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह, सीपीसीबी वडोदरा के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार झा, वन विभाग तथा जीपीसीबी के उच्चाधिकारी-कर्मचारी और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।











