सुप्रीम कोर्ट की संगीत लोढ़ा कमेटी का सबसे बड़ा धमाका: जोधपुर, पाली व बालोतरा में गंभीर ‘प्रशासनिक विफलता’ उजागर, सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट


सनसनीखेज: निरीक्षण से ठीक पहले नदी में मिट्टी डालकर केमिकल छुपाने की साजिश पकड़ी, घरेलू सीवरेज लाइनों में फैक्ट्रियों के अवैध कनेक्शन


महाप्रहार: रिपोर्ट के बाद 78 अवैध कपड़ा फैक्ट्रियां सीज व ध्वस्त; लूणी, बांडी और जोजरी नदी तंत्र को तबाह करने वाले रसूखदारों पर कसेगा कानूनी शिकंजा


बालोतरा/जोधपुर: मारवाड़ के औद्योगिक अंचलों में दशकों से चल रहे देश के सबसे बड़े पर्यावरणीय महाघोटाले को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-लेवल कमेटी ने एक ऐसी विस्फोटक स्टेटस रिपोर्ट पेश की है, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर जयपुर सचिवालय तक हड़कंप मचा दिया है। कमेटी के अध्यक्ष व राजस्थान उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश (रिटायर्ड जस्टिस) संगीत लोढ़ा की ओर से तैयार की गई इस बेहद गोपनीय और तकनीकी रिपोर्ट में जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र में गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी ‘सिस्टेमिक फेलियर’ (Systemic Failure) को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) और स्थानीय प्रशासन की रसूखदार उद्यमियों के साथ मिलीभगत को पर्यावरण विनाश का मुख्य कारण माना गया है।

सुप्रीम कोर्ट कमेटी की स्टेटस रिपोर्ट के मुख्य कड़वे सच

  • साजिश का पर्दाफाश: विधिक कमेटी के औचक निरीक्षण से ठीक पहले नदी के पेटे पर ताजा मिट्टी डलवाकर गाद (Sludge) और रंगीन पानी छुपाने का हुआ था प्रयास।
  • सिस्टम को किया पंगु: कपड़ा फैक्ट्रियों ने नगर परिषद की घरेलू सीवर लाइनों में डाल रखे थे गुप्त पाइपलाइन कनेक्शन; रिहायशी इलाकों के एसटीपी (STP) ठप।
  • सीईटीपी केवल हाथी के दांत: ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETPs) क्षमता से कम कर रहे काम, शोधित किए बिना ही केमिकल युक्त तेजाबी पानी सीधे नदियों में बाईपास।
  • कड़ा हंटर: रिपोर्ट की सख्ती के बाद हरकत में आए प्रशासन ने अब तक 78 से अधिक अवैध कपड़ा फैक्ट्रियों को जमींदोज व सीज किया।

स्टेटस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जब जस्टिस संगीत लोढ़ा की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो उससे ठीक पहले भू-माफियाओं और उद्यमियों ने लूणी और बांडी नदी के पेटे और किनारों पर रातों-रात ताजा मिट्टी डलवा दी थी। इसका उद्देश्य नदी में जमा जहरीले केमिकल और घातक गाद (Sludge) को विधिक जांच से छुपाना था, जिसे कमेटी ने रंगे हाथों पकड़ लिया।

घरेलू सीवरेज लाइन में डाका: टेक्सटाइल फैक्ट्रियों ने अत्यधिक शातिरपन दिखाते हुए नगर परिषद द्वारा बिछाई गई घरेलू सीवर लाइनों के भीतर अपने अवैध और गुप्त पाइपलाइन कनेक्शन जोड़ रखे थे। इसके चलते रिहायशी इलाकों का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरी तरह खराब होने की कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि वह औद्योगिक केमिकल रिफाइन करने के लिए नहीं बना है।

रिपोर्ट कहती है कि करोड़ों की लागत से बने सीईटीपी (CETP) अपनी पूरी क्षमता पर काम ही नहीं कर रहे हैं। क्षमता से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट को सीधे लूणी, बांडी और जोजरी नदी तंत्र में बहाया जा रहा है। जस्टिस लोढ़ा ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) और स्थानीय जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये तथा लंबे समय से चली आ रही लापरवाही को इस तबाही का मुख्य जिम्मेदार ठहराया है।

78 से अधिक फैक्ट्रियों पर तुरंत ताला: सुप्रीम कोर्ट की इस स्टेटस रिपोर्ट के विधिक प्रभाव से बालोतरा, पाली और जोधपुर क्षेत्र में खलबली मच गई है। आनन-फानन में स्थानीय प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाते हुए अब तक 78 से अधिक अवैध रूप से संचालित कपड़ा फैक्ट्रियों को न केवल सीज किया है, बल्कि उनके पक्के निर्माणों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया है।

जी-नाले के पास चल रहा ‘ऑपरेशन डिगिंग’: नगर परिषद और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमें अब लूणी नदी और जी-नाले (G-Drain) के आस-पास हाईटेक मशीनों से जमीन खोदकर फैक्ट्रियों द्वारा डाले गए अवैध भूमिगत पाइपलाइनों और गुप्त कनेक्शनों को स्थाई रूप से काट रही हैं। हाईवे और औद्योगिक रास्तों पर 24 घंटे पुलिस की सख्त नाकाबंदी की गई है।

‘पोल्यूटर पेज़ प्रिंसिपल’ लागू, वैध फैक्ट्रियों पर भी तलवार: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अब वैध रूप से चल रही फैक्ट्रियों के लिए भी वेंटिलेटर जैसी स्थिति पैदा हो गई है। बिना प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट (PTP) और डिजिटल फंक्शनल फ्लोमीटर के चलने वाली किसी भी इकाई को एक मिनट भी चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली मिलों को ‘पोल्यूटर पेज़ प्रिंसिपल’ (प्रदूषण फैलाओ और भारी हर्जाना भुगतो) के तहत करोड़ों रुपये का वित्तीय दंड देना होगा, अन्यथा उन्हें हमेशा के लिए बंद होना पड़ेगा।

“सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संगीत लोढ़ा कमेटी द्वारा प्रस्तुत यह स्टेटस रिपोर्ट मारवाड़ की जीवनदायिनी नदियों की हत्या की पूरी विधिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट साफ बयां करती है कि कैसे रसूखदार कपड़ा उद्योगपतियों ने स्थानीय अधिकारियों को अपनी जेब में रखकर पूरी व्यवस्था को पंगु बना दिया था। नदी के पेटे में मिट्टी डालकर प्रदूषण छुपाने का दुस्साहस बिना विभागीय अधिकारियों की मौन सहमति के संभव ही नहीं है। अब जब 78 फैक्ट्रियों पर ताला लग चुका है और रिपोर्ट सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत की मेज पर है, तो मुख्यमंत्री कार्यालय को भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उन दागी और लापरवाह अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहिए जो एसी कमरों में बैठकर ‘ऑल इज वेल…

*File Photo

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