मोरबी मच्छु-2 बांध के किनारे तैरता देखे गये काले रंग के पानी का मामला, डोमेस्टिक वेस्ट की फ्लाय एश होने का सामने आया
मोरबी: जब किसी कस्बे या शहर की विरासत को नुकसान या क्षति पहुंचाई जाती है है तब जनता का गुस्सा फूटना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक मामला मोरबी शहर में देखने को मिला। मोरबी में मच्छु-2 बांध के किनारे पानी पर काले रंग की परत दिखने पर पहली नजर में ही लगता है कि किसी ने रासायनिक तरल पदार्थ से बांध को प्रदूषित कर दिया है। लेकिन, बांध में पानी पर देखी गई काले रंग की परत वजह डोमेस्टिक वेस्ट की फ्लाय एश होने का पाये जाने से स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर है।
मोरबी में एक जागरूक नागरिक ने वीडियो के माध्यम से मच्छू-2 बांध में पानी पर काले रंग की परत दिखाई देने का किस्सा सामने आया था। यह किस्सा संज्ञान में आते ही डैम साइट और जीपीसीबी की टीम मौके पर पहुंची और ये काले रंग का पानी डैम तक कैसे पहुंचा इसकी जांच मे जूड गई। हालांकि, प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चलता है कि पानी में इस काले रंग कि परत का कारण डोमेस्टिक वेस्ट जलाने से निकलने वाली फ्लाय ऐश है। हालाँकि, रासायनिक प्रदूषण की संभावना को देखते हुए पानी के नमूने लिए गए है।
इस बारे में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी महेंद्र सोनी ने कहा कि हमारी टीम ने सिंचाई विभाग की टीम के साथ तत्काल जांच शुरू कर दी है। हमने बांध स्थल के आसपास के क्षेत्र की जांच की, जिसमें पता चला कि बड़े पैमाने पर कचरा जलाने से निकली राख के पानी में मिल जाने के कारण इन क्षेत्र में पानी काला हो गया है। हालांकि, किसी ने यह पानी की धारा में कोई रासायनिक तरल छोड़ा होगा इस संभावना की जांच के लिए हमने पानी के सैंपल लिए, जिसे गांधीनगर प्रयोगशाला भेजा गया है।
यहां, गौरतलब है कि मच्छू-2 मोरबी शहर और इसके आसपास के दस जितने ग्रामीण इलाकों के लिए पानी का स्रोत है। मोरबी और उसके आसपास उद्योग हैं और जब इस क्षेत्र से गुजरने वाली नर्मदा नहर से बांध में पानी छोडा जाता है, इसलिए किसी औद्योगिक इकाई द्वारा उसमें केमिकल युक्त पानी छोडा गया हो शकता है, ऐसी संभावना के ले के एक सतर्क नागरिक द्वारा जारी किए गए वीडियो के माध्यम से यह घटना सभी के ध्यान में आई। जिसके बाद संबंधित तंत्र द्वारा जांच का सिलसिला शुरू किया गया। हालांकि, यहां खुशी की बात यह है कि अब लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं।












