सुवेज फार्म, बहरामपुरा के प्रदूषण माफिया बेलगाम: ज्वलंत एसिड युक्त प्रदूषित तरल को नदी में डायरेक्ट छोड़ने का वीडियो वायरल, जिम्मेदार प्रशासन नींद से कब जागेगा?

शहर के सुवेज फार्म, बेहरामपुरा के प्रोसेस हाउस द्वारा अवैध रूप से कारखाने के भीतर जल निकासी लाइनों के माध्यम से अत्यधिक प्रदूषित एसिड युक्त पानी को नदी में बहाने का सिलसिला अभी भी जारी


अहमदाबाद: शहर में एक बार फिर केमिकल माफिया सक्रिय दिखाई दिये और फ़ेक्टरी के अंदर गटर लाइनों के माध्यम से अवैध रूप से अत्यधिक प्रदूषित अत्यंत एसिड-केमिकल युक्त तरल सीधे छोड़े जाने का एक वीडियो वर्तमान में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो सुएज फार्म इलाके की एक फ़ेक्टरी का बताया जा रहा है।

एक ओर साबरमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर हाईकोर्ट लाल आंखें दिखा रही है और अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) को बार-बार फटकार लगाई है तथा जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए सख्त निर्देश जारी करती आ रही हैं, वहीं यह वायरल वीडियो हर नियम और कानून को अपनी जेब में रखकर घूमने वाले लोगों की गेरकानुनी हरकतों का पर्दाफ़ाश करके उजागर कर रही है।

साबरमती नदी में अत्यधिक प्रदूषित पानी सीधे छोड़े जाने के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। फिर इस तरह एसिड-केमिकल युक्त पानी सीधे नदी में डाले जाने का वीडियो वाकई चौंकाने वाला है। यह वीडियो गंभीर तरीक़े से देखना चाहिये क्योंकि यह तरल को उद्योग जगत की भाषा में अनट्रिटेड स्पेंट एसिड के नाम से जाना जाता है जो पर्यावरण को गंभीर प्रकार से प्रतिकूल नुक़सान कारक होने के बावजुद करोड़ों रुपये कमाने के हेतु से केमिकल माफिया भ्रष्टाचार के तहत सारे क़ायदाकिय नियमों का सरेआम उल्लंघन कर रहे होने की संभावना को नकार नहीं सकते ।

इस वीडियो में GJ-18-AU-8336 नंबर की टैंकर से अंदाजित 25,000 लीटर जितनी भारी मात्रा में स्पेंट एसिड-केमिकल युक्त एक फ़ेक्टरी की गटर लाइन के माध्यम से डायरेक्ट छोड़े जाने की हक़ीक़त दिखाई दे रही है। यह टैंकर प्रदूषित एसिड युक्त लिक्वीड अहमदाबाद शहर से या अहमदाबाद के बाहर अन्य किसी शहर से ट्रांसपोर्ट करते है इसकी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन इन टैंकरों से लाकर छोड़ने वाला अत्यधिक प्रदूषित एसिड-केमिकल युक्त पानी फ़ेक्टरीयों के नालों के माध्यम से साबरमती नदी में छोड़ा जा रहा है, जो जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारियों के लिए बहुत शर्म की बात है। लेकिन एक बात तो तय है कि यह केमिकल माफियाओ को जिम्मेदार प्रशासन का किसी भी तरह का कोई भी डर नहीं है और वे लगातार पर्यावरण को खतरे में डाल रहे हैं।

वीडियोः

यह वायरल वीडियो इस बात का सबूत है कि इस क्षेत्र के औद्योगिक माफियाओं को ऐसे काले कारनामे करने के लिए जीपीसीबी, अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का कोई डर रहा नहीं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते और उन्हें तुरंत इस वायरल वीडियो की संपूर्ण जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और कानून के प्रावधानों के आधार पर आपराधिक मामले के अन्तर्गत दोषियों को जेल में डालकर एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए।

हालांकि, यह वीडियो वायरल होने के बाद ज़िम्मेदार ईकाई को के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाने की बाते सुनी जा रही है। इस मामले में यह जानकारी भी प्राप्त हुइ है की जीपीसीबी की और से सुपार्श्वा टेक्सप्रिन्ट को क्लोज़र नोटिस जारी किया गया है। लेकिन कुछ दिनो के लिए फ़ेक्टरी बंद करवाने और कुछ दंडनिय राशि वसूल कर पुन: चालू करवाने से इस विस्तार के माफिया कभी नहीं सुधरने वाले हैं। बहरहाल, इस मामले में यह जरूरी है कि इतना खतरनाक और प्रदूषित तरल पदार्थ कहां से लाया गया और इसके पीछे कितने लोग शामिल हैं, इसका ब्यौरा सामने आए और तभी पूरे मामले का जड़ से पर्दाफाश हो सकेगा।

जैसा वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदूषित केमिकलयुक्त तरल को फ़ेक्टरियों की गटर लाइनों के माध्यम से सीधे साबरमती नदी मे डाला जा रहा है – जिससे नदी में रहने वाली मछलियों सहित जलीय जीवों के जीवन को खतरे में डालना एक गंभीर प्रकार का आपराधिक कृत्य है तथा नदी तल में अंडर ग्राउंड वोटर स्ट्रेटा को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। अब देखना यह है कि वर्षों से माननीय गुजरात हाईकोर्ट की बार-बार टकोर के बावजूद संबंधित जिम्मेदार तंत्र के भ्रष्ट अधिकारी कब नींद से जागते है।

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