नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) ने गुजरात और दीव-दमन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया

  • भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) का स्वतः संज्ञान
  • 25 राज्यों के भूजल में आर्सेनिक और 27 राज्यों में फ्लोराइड पाया गया
  • संबंधित राज्यों को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किये गये

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) ने देश के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्यों को इस संबंध में जवाब देने का आदेश दिया था। ट्रिब्युनल ने इस संबंध में निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं देने पर गुजरात और दमन एवं दीव पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

संबंधित राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र है प्रतिवादी

इस पूरे मामले पर शुरू से नजर डाले तो नवंबर 2023 में 25 राज्यों में भूजल में आर्सेनिक और 27 राज्यों में फ्लोराइड की उपस्थिति की खबर प्रकाशित हुई थी। NGT ने 25 राज्यों के 230 जिलों और भूभागों के भूजल में आर्सेनिक और 27 राज्यों के 469 जिलों और भूभागों में फ्लोराइड का मामला दर्ज किया था। जिसमें NGT ने 20 दिसंबर 2023 के अपने आदेश द्वारा संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिवादी के रूप में शामिल किया और उन्हें एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किए।

गुजरात और दीव-दमन की ओर से जवाब दाखिल नहीं किये गये

जब 7 अगस्त, 2024 को मामले की सुनवाई हुई, तो यह पाया गया कि झारखंड, नागालैंड, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव सहित कुछ राज्यों की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए गए थे, इसलिए ट्रिब्युनल ने निर्देश दिया कि जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, वे चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करें, ऐसा न करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव/पीएचई विभाग के प्रधान सचिव अगली सुनवाई की तारीख पर ट्रिब्युनल के समक्ष वर्चुअली उपस्थित होंगे।

उपरोक्त निर्देशों के बावजूद, गुजरात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव की ओर से रिपोर्ट दायर नहीं की गई और न ही उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव/मुख्य सचिव वर्चुअली उपस्थित हुए। जिसके सम्बन्ध में 19 नवम्बर 2024 को ट्रिब्युनल ने निर्देश दिया कि उपरोक्त निर्देश के बावजूद इन तीन राज्यों एवं एक केन्द्र शासित प्रदेश ने यह कहते हुए जवाब दाखिल नहीं किया है कि उनके पीएचई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/मुख्य सचिव वर्चुअली उपस्थित नहीं रहे थे। ये तीन राज्य, अर्थात् नागालैंड, झारखंड और गुजरात तथा केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे। इसलिए, ट्रिब्युनल के पास इन तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के पीएचई विभाग के प्रधान सचिव को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

पीएचई विभाग के प्रधान सचिव द्वारा फिर की गई अनदेखी

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान पाया गया कि गुजरात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव के पीएचई विभाग के प्रधान सचिव द्वारा उपरोक्त निर्देश की फिर से अनदेखी की गई है। उन्होंने अभी तक कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं की, न ही वे सुनवाई में उपस्थित रहे। गुजरात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव के पीएचई विभाग के प्रधान सचिव द्वारा न्यायाधिकरण के आदेशों की पूरी तरह से अनदेखी की गई और उनका अनुपालन नहीं किया गया।

गुजरात और दीव-दमन को 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

इस मामले में नोटिस जारी हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद गुजरात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दमन एवं दीव ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। उपरोक्त परिस्थितियों में, गुजरात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव के पर्यावरण सचिव पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना दो सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करना होगा।

उपरोक्त के अधीन, गुजरात राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश क्षेत्र दमन एवं दीव के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। मामले की सुनवाई 16 जुलाई 2025 को होगी।

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