RSPCB के जयपुर में बैठे उच्च अधिकारियों द्वारा लगातार NGT आर्डर का किया जा रहा है वॉयलेशन
RSPCB के द्वारा माननीय NGT के आदेशों की अवहेलना किसकी शह पर?
जिम्मेदार ही अपनी आंखें बंद कर ले और प्रदूषण फैलाने में अपनी मौन स्वीकृति दे, तो फिर प्रदूषण कैसे रुके?
जिम्मेदार मौन क्यो?
पालीः जहा एक और भारत सरकार विश्व पटल पर प्रदूषण मुक्त भारत बनने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी और अपनी जिम्मेदारियों से दूर राजस्थान के कुछ आला सरकारी अफसर अपनी आंखें बंद कर प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे है। इस संबंध में और एक खबर राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र से सामने आई है। राज्य में बालोतरा सीईटीपी औद्योगिक प्रदूषण को लेकर चर्चा में आने के बाद और एक औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी हुई खबर सामने आयी है, और यह खबर राजस्थान मैं बहुत लंबे समय से प्रदूषण की पीड़ा झेल रहे टेक्सटाइल नगरी के नाम से जाने जाना वाला शहर पाली से।
पाली हो रहा है औद्योगिक प्रदूषण से दूषित
जैसा हमने आगे जिक्र किया है कि बालोतरा सीईटीपी फिर से चालु होने के बाद स्थानीय स्तर पर खास कर लूनी नदी में औद्योगिक प्रदूषण को ले के चर्चा में आ गया है, वही पाली का सीईटीपी फाउंडेशन से भी बांडी नदी को औद्योगिक प्रदूषण से हो रही अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति को लेकर टेक्सटाइल नगरी पाली भी चर्चा के केन्द्र में आ गई।
एनजीटी के आदेशों की खुल्लम खुल्ला अवहेलना
पाली स्थित सीईटीपी प्लांट 4 को जब से नदी मै पानी डालने की इजाजत दी गई सर्वप्रथम तो ये माननीय एनजीटी के आदेशों की खुल्लम खुल्ला अवहेलना है और उसके पश्चात एक भी सैंपल के रिजल्ट पैरामीटर से सही नही आने के बाद भी कोई भी सरकारी अफसर उनके विरुद्ध कार्यवाही करने को तैयार नहीं।
…लेकिन, कार्यवाही तो दूर कोई नोटिस तक नहीं दिया गया
अभी हाल ही मैं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के स्थानीय कार्यालय ने पाली सीईटीपी प्लांट नंबर 6 जो पूर्णतया जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यानी की जेडएलडी संचालित होने का दावा करता है, उसे अपनी सम्मति प्रदान की है। बड़े बड़े पाइप लगाकर अनट्रीटेड पानी सीधे नदी मै छोड़ते हुए पाया गया पर हमेशा की तरह जयपुर बैठे उच्च अधिकारियों ने अपनी आंखे मूंद ली और उन्हें प्रदूषण फैलाने की कोई सजा नही दी बल्कि उनको इस कृत्य के लिए इनाम से नवाजा गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसकी रिपोर्ट जयपुर ऑफिस हेड ऑफिस में होने के लगभग 20 दिन से भी ज्यादा हो चुके हैं लेकिन कार्यवाही तो दूर कोई नोटिस तक नहीं दिया गया।
आप सोच रहे होंगे इनाम कैसा ?
सीईटीपी प्लांट 4, माननीय एनजीटी कोर्ट के आदेशानुसार जिसकी सम्मति जेडएलडी पर दी जानी चाहिए थी रसूलदारो के प्रभाव से कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए उन्हें टर्सरी तक ट्रीट करके पानी नदी मै डालने को इजाजत दे दी गई और सिर्फ इतना ही नहीं जहा ये सम्मति हर बार 3–3 माह के लिए दी जाती थी। प्लांट 6 के नदी मै सीधे पानी छोड़ने की घटना पकड़ मैं आने के तुरंत बाद उन्हें इस बार 6 माह की सम्मति दे दी गई।
बांडी नदी में सीधा छोडा जा रहा है प्रदूषित पानी
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स से सामने आया है की राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों ने भी अब कबूल लिया है की सीईटीपी ट्रीटमेंट प्लांट 6 से भी प्रदूषित पानी सीधा बांडी नदी में छोडा जा रहा है। बोर्डे आरओ द्वारा समय समय पर कि जा रहे निरीक्षण की 14 जून की रिपोर्ट में स्वीकार यह किया गया है साथ ही उस दिन जयपुर से आई टीम ने भी निरीक्षण किया था। सीईटीपी के प्लांट 6 व 4 से प्रदूषित पानी बांडी नदी में छोडा जा रहा है, लेकिन सीईटीपी फाउंडेशन के पदाधिकारी व प्लांट इंचार्ज इससे पहले हर बार ना करते रहे।
फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी को ट्रीट करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र में सीईटीपी का ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है, लेकिन प्लांट 4 से प्रदूषित पानी सीधा बांडी नदी में छोडा जा रहा है, तो दूसरी ओर फेक्ट्री संचालको से पैसा भी वसूला जा रहा है, यह बात हैरत करने वाली है।
9 महिने बंद का सामना करने बाद फिर से हुआ था कार्यरत
पाली स्थित सीईटीपी फाउंडेशन की पार्श्वभूमी पे प्रकाश डाले तो, लंबे समय तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में इस मामले की सुनवाई हुई और 2016 में पूरे पाली टेक्सटाइल उद्योग को 9 महीने बंद का सामना करना पड़ा, उसके बाद आस पास के लाखों किसानों की तकलीफ के मद्देनजर और उद्योग भी बंद न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पाली टेक्सटाइल उद्योग से निकलने वाले खतरनाक पानी के अपशिष्ट को नदी मे न बहाकर पुन: काम में लेकर और बचे अपशिष्ट को उड़ा कर उद्योगों को पुनः: चालू करने की सहमति दी।
कैसे रूके प्रदूषण, जब जिम्मेदार ही दे अपनी मौन स्वीकृति
इस दिशा में बढ़ते हुए सीईटीपी फाउंडेशन ने कुछ प्रयास भी किए पर जब प्रदूषण को रोकने के लिए जिम्मेदार ही अपनी आंखें बंद कर ले और प्रदूषण फैलाने मैं अपनी मौन स्वीकृति दे दे तो फिर प्रदूषण कैसे रुके? कई बार पाली सीईटीपी और उद्योगों द्वारा नदी में प्रदूषित पानी छोड़ने की शिकायत मिली पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने उन्हें मात्र नोटिस देकर इतिश्री कर ली।
किसी भी ट्रीटेड या अनट्रीटेड औद्योगिक पानी को नदी में नहीं छोडने का एनजीटी का था आदेश
सबसे बड़ी बात तो ये है की राज्य के प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आला अफसर अपने आपको माननीय एनजीटी से भी बड़ा मानते है और उन्होंने एनजीटी के आदेशों के विरुद्ध सीईटीपी को नदी मै पानी छोड़ने की इजाजत दे दी, जबकि माननीय एनजीटी कोर्ट द्वारा अपने निर्णय में साफ तौर पर ये कहा गया है की सीईटीपी या कोई भी उद्योग किसी भी प्रकार का ट्रीटेड और अनट्रीटेड पानी नदी मै नही छोड़ सकता। प्रकृति के विनाश यज्ञ में अपनी आहुति देने वाले जिम्मेदार प्रशासन की यह अनदेखी से बेचारे किसान बहुत परेशान रहते है। किसान की जमीन और फसल खराब होती है पर ऐसा लगता है कि जिम्मेदार प्रशासन को इससे कोई फर्क नही पडता?
हमारे देश की व्यवस्था पर अफसोस होता है की यहां किसान होने से ज्यादा फायदेमंद उद्योगपति होना है जो अपने प्रभाव से प्रशासन से वो काम भी करवा लेता है जो न्यायसंगत नहीं है या यू कहिए न्यायपालिका के निर्णय के विरुद्ध है। और हमे शर्म आती है ऐसे सरकारी अफसरों पर जो अपने पद का दुरुपयोग करके अनियमितताओं को बढ़ावा देते है।