भारत की पहली वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी के चालू होने के साथ नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट ने प्रमुख उपलब्धि हासिल की
अहमदाबादः सर्कुलर इकोनॉमी आज देश और औद्योगिक विकास की प्रमुख आवश्यकता है, खासकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा होने के कारण इसे अपनाना एक स्वागतिय कदम कहा जा सकता है। इस संबंध में अहमदाबाद की वटवा जीआईडीसी स्थित नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट ने वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
अहमदाबाद की वटवा जीआईडीसी स्थित नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट ने भारत की पहली वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी शुरू की है, जो पर्यावरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट में आयोजित वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी के उद्घाटन समारोह में सांसद हसमुखभाई पटेल की विशेष उपस्थिति में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आईएएस आर. बी. बारड मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के रूप में जीपीसीबी सदस्य सचिव डी. एम. ठाकर, नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट के चेयरमेन भूपेन्द्रभाई सी. पटेल, मैनेजिंग डिरेक्टर दिनेशभाई शाह, डिरेक्टर दीपकभाई दावड़ा, वाईस चेयरमेन – एडमीन आनंदभाई पटेल, वाईस चेयरमेन – टेक्नोलोजी सुरेशभाई पटेल, वटवा ग्रीन एनवायरनमेंट सर्विस कॉ.ओप. सोसायटी के चेयरमेन रमेशभाई पटेल और वटवा इन्डस्ट्रीयल एसोसिएसन के प्रेसिडेंट डिंपलभाई पटेल सहित प्रमुख उद्योगपति उपस्थित थे।
वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी के बारे में बोलते हुए, नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट के चेयरमेन भूपेन्द्रभाई सी. पटेल ने कहा, “नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट में हमें वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी प्रणाली शुरू करने पर बहुत गर्व है, क्योंकि यह देश में पहली और एकमात्र सुविधा है। नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट में भारत की इस पहली वाटरलेस न्यूट्रलाइजेशन फेसिलिटी के चालू होने के साथ, स्पेंट सल्फ्यूरिक एसिड ट्रीटमेंट के लिए हमारी न्यूट्रलाइजेशन क्षमता 500 टन प्रति दिन से दोगुनी होकर 1000 टन हो गई है। इस प्रणाली के कार्यान्वयन से पर्यावरण को लाभ होगा क्योंकि पुरानी प्रणाली की तुलना में प्रति दिन 5 लाख से अधिक एफ्लुएंट कम उत्पन्न होंगे, जो एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि है। इस प्रणाली के शुरू होने से बीओडी और सीओडी का जो लोड 3 हजार से 4 हजार होता था, वह घटकर 1 हजार के अनुपात में रह जाएगा। अब तक हमने यहां 26 लाख मेट्रिक टन सल्फ्यूरिक एसिड का प्रबंधन किया है, जिसमें से 16 लाख टन स्पेंट सल्फ्यूरिक एसिड को न्युट्रलाईजेशन कर दिया गया है, जिसमें से 9.5 लाख टन जिप्सम का उत्पादन हमारे द्वारा सीमेंट उद्योग को नियम-9 के तहत सह-प्रसंस्करण के माध्यम से दिया गया है।”
इस अवसर पर नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक दिनेशभाई शाह ने कहा, “नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रसिद्ध संगठन है। वटवा, नरोडा और ओढव सहित अहमदाबाद के आसपास उद्योग के लगभग 250 सदस्यों के लिए जीवन रेखा समान है। नोवेल में हम न केवल उद्योगों की समस्याओं का समाधान करते हैं बल्कि उचित मूल्य पर सीमेंट उद्योग को जिप्सम की आपूर्ति भी करते हैं। जो तीन ‘आर’ रिड्यूस, रीसायकल और रीयूज के स्थापित नियमों का पालन करता है, वह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है।’
नोवेल स्पेंट एसिड मैनेजमेंट के बारे में जानकारी प्राप्त करें तो डाइज, डाइज इंटरमीडिएट्स और अन्य रासायनिक उत्पादों जैसे उद्योगों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान स्पेंट सल्फ्यूरिक एसिड उत्पन्न होता है, जिसके उपचार में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और उनका उत्पादन भी काफी कम हो जाता था। इसी कठिनाई को ध्यान में रखते हुए इस संस्था की स्थापना वर्ष 2009 में स्वर्गीय शंकरभाई पटेल ने अपने उद्योगपति मित्रों के साथ मिलकर की थी। नोवेल भारत की एकमात्र अनूठी कॉमन फेसिलिटी है, जो विभिन्न उद्योगों द्वारा उत्पादित और स्पेंट सल्फ्यूरिक एसिड का मैनेजमेंट करती है। वटवा जीआईडीसी में 44000 चोरस मीटर में फैले इस संस्थान की स्थापना गुजरात और केंद्र सरकार की आईआईयुएस यानी इन्डस्ट्रीयल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन स्कीम के तहत और सदस्यों के सहयोग से लगभग 30 करोड़ के निवेश से की गई थी।