राजस्थान में पंजाब से आ रहे जहरीले पानी की रोकथाम को लेकर एक बार फिर जन आंदोलन की तैयारी

  • छह जून को होने वाली पहली बैठक के बाद जिला कलेक्टर को मांग पत्र सौंपा जायेगा
  • उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, जलवायु एवं पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग सहित कई संस्थाओं तक यह मामला पहुंचा, लेकिन फिर भी पंजाब से जहरीला पानी आना रुक नहीं रहा
  • पश्चिमी राजस्थान में जहरीला एवं प्रदूषित पानी पीने से कैंसर जैसी अन्य असाध्य बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा

श्रीगंगानगर:  राजस्थान में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों सहित पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों में पंजाब से इंदिरा गांधी नहर, गंग नहर और भाखड़ा नहर योजना के जरिये आ रहे जहरीले पानी की रोकथाम को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी शुरू हो गयी है।

गुरुवार को होगी बैठक

इस संबंध में गुरुवार को श्रीगंगानगर में रेलवे स्टेशन रोड पर गुरुद्वारा सिंह सभा में एक बैठक आयोजित की गयी है। बैठक में सभी राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से पहुंचने का अनुरोध किया गया है।

नहरों में जहरीले पानी की रोकथाम की मांग को लेकर कई बार आंदोलन

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रवक्ता और जन आंदोलन समिति के सह संयोजक रवीन्द्र तरखान ने बताया कि एक दशक से श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिलों के लोग नहरों में जहरीले पानी की रोकथाम की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं। उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, जलवायु एवं पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग सहित कई संस्थाओं तक यह मामला पहुंचा, लेकिन फिर भी पंजाब से जहरीला पानी आना रुक नहीं रहा।

सतलुज- ब्यास दरिया में छोड़ा जाता है रसायनयुक्त पानी

उन्होंने बताया कि पंजाब की तरह पश्चिमी राजस्थान में जहरीला एवं प्रदूषित पानी पीने से कैंसर जैसी अन्य असाध्य बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के लुधियाना सहित कई शहरों के सीवरेज और औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त पानी बुड्ढा नाला के जरिए सतलुज- ब्यास दरिया में छोड़ा जाता है। यही पानी फिर इंदिरा गांधी नहर और अन्य नहरों से राजस्थान में पहुंच रहा है।

पशु पक्षी भी पीते हैं पानी

रवीन्द्र ने बताया कि पानी से जहां फसलों की सिंचाई की जाती है, वहीं इसी पानी की जलदाय विभाग के जरिये पेयजल के लिये घरों में भी आपूर्ति की जाती है। यही पानी पशु पक्षी भी पीते हैं। हाल ही में गंगनहर में पंजाब से पानी के साथ हजारों की तादाद में मृत मुर्गे और मुर्गियों के शव श्रीगंगानगर जिले की नहरों में पहुंचे। इस पर जिला कलेक्टर लोक बंधु ने गंभीर संज्ञान लिया। उन्होंने पंजाब के संबंधित जिलों के अधिकारियों से फोन पर बात की। उनको पत्र लिखकर मृत मुर्गे- मुर्गियां नहर में डालने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाने का आग्रह किया है।

क्या है लगाये गये कई जल शोधन संयंत्र की स्थिति?

उधर जहरीले पानी का मुद्दा एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। पहले भी कई बार आंदोलन हो चुके हैं। भाजपा के पूर्व सांसद निहालचंद मेघवाल ने कुछ अर्सा पहले बताया था कि केंद्र सरकार में पंजाब को सतलुज-ब्यास दरिया में डाले जाने वाले गंदे पानी को शोधन करने के लिये 776 करोड़ से अधिक की राशि दी गयी है। पंजाब में कई जल शोधन संयंत्र लगाये गये हैं, लेकिन ये या तो बंद पड़े हैं, अथवा पूरी तरह से उपयोग में नहीं लिये जा रहे। कई संयंत्रों का निर्माण चल भी रहा है।

जहरीले पानी से मुक्ति के लिए जनता के हर वर्ग की भागीदारी बेहद जरूरी

प्रवक्ता रविंद्र तरखान ने बताया कि इस सारे मसले को लेकर कल गुरुद्वारा सिंहसभा में बुलाई गई बैठक में जन आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा तैयार की जायेगी। बैठक में पूर्व पार्षद मनिंदर मान, सुखवीर सिंह फौजी, रमन रंधावा, विकास घोडेला आदि शामिल होंगे। तरखान ने कहा कि पेयजल आपूर्ति के नाम पर श्रीगंगानगर जिले ही नहीं बल्कि तीनों नहर परियोजनाओं से लाभांवित राजस्थान के बड़े हिस्से की जनता को ज़हर परोसा जा रहा है। समय समय पर जनता ने सरकारों तक अपनी बात पहुंचाई लेकिन आज तक कोई ठोस हल नहीं निकला,जो कि चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गंदे और जहरीले पानी से मुक्ति के लिए जनता के हर वर्ग की भागीदारी बेहद जरूरी है। छह जून को होने वाली पहली बैठक के बाद जिला कलेक्टर को मांग पत्र सौंपा जायेगा। उसके बाद आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार की जायेगी।

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