द्रव्यवती नदी का काला सचः बीजेपी सरकार ने जिस सपने को संजोया कांग्रेस सरकार ने आते ही उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया

कांग्रेस सरकार में प्रोजेक्ट लेट होने से प्रोजेक्ट कॉस्ट में बहुत ज्यादा वृद्धि हो गई

लेखकः डा. विकास चौधरी (जैन)


57 किलोमीटर लंबी द्रव्यवती नदी

भविष्य की योजना की तस्वीर

जयपुर शहर में नॉर्थ से साउथ तक बहने वाली द्रव्यवती नदी 57 किलोमीटर लंबी भारत की सबसे छोटी नदियों में शामिल है। समय के साथ-साथ यह नदी नाले का रूप लेती चली गई और प्रदूषण का पर्याय बन गई अब तक इसका नाम बदल कर अमनीशाह नाला पड़ चुका था। 2015 में टाटा ग्रुप ने एक रिपोर्ट तैयार कर इस नदी के पुन: उत्थान की बात रखी और अक्टूबर 2015 को राजस्थान स्टेट लेवल एंपावर्ड कमेटी (SLEC) ने इस प्रोजेक्ट को अप्रूव कर दिया और जेडीए द्वारा 1676 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 तक कंप्लीट करने के लिए टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दे दिया गया जिसमें 1470 करोड़ रुपए की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और 206 करोड़ रुपए का 10 साल का मेंटेनेंस शामिल था।

जयपुर को क्लीन और स्मार्ट सिटी बनाने वाला प्रोजेक्ट

भविष्य की योजना की तस्वीर

प्रोजेक्ट के बारे में सुने तो लगता था कि इससे पॉल्यूशन का लोड बहुत कम हो जाएगा यह जयपुर को क्लीन और स्मार्ट सिटी बना देगा प्रोजेक्ट में ना सिर्फ 170 एमएलडी पानी रोज ट्रीट करने का प्रावधान था बल्कि नदी के दोनों तरफ ग्रीन स्पेस में 17000 पेड़ पौधे, 38 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रेक, बगीचे, तीन बड़े गार्डन, लैंडस्कैपिंग, पब्लिक टॉयलेट, एलइडी स्ट्रीट लाइट, 5 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की प्लानिंग की गई थी।

जयपुर की सुंदरता को बढाते आवोहवा बदलने वाला प्रोजेक्ट

भविष्य की योजना की तस्वीर

यह सोच थी कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ जयपुर की सुंदरता में चार चांद लगाएगा बल्कि जयपुर की आवोहवा भी बदल जाएगी। पर्यावरण की दृष्टि से यह प्रोजेक्ट न सिर्फ जयपुर की आवो हवा बदलता बल्कि सीवरेज ट्रीट होने पर जमीन के पानी का स्तर भी बड़ता और सबसे बड़ी बात सिवरेज के पानी में जो अस्वास्थकारक खेती हो रही है वह भी रुक जाती।

 

2018 में पूरा होना था प्रोजेक्ट

यह तस्वीर का एक पहलू है जो बहुत ही खूबसूरत है, जब पूरे प्रोजेक्ट को सुनते हैं तो लगता है हम किसी यूरोपियन देश में आ गए हैं पर अंतः वही हुआ कि सरकार की उदासीनता से न सिर्फ यह प्रोजेक्ट जो 2018 में पूरा होना था आज 2024 तक भी पूरा नहीं हो पाया।

एंड ऑफ द डे 5 साल से ज्यादा प्रोजेक्ट लेट होने का मतलब प्रोजेक्ट कॉस्ट में बहुत ज्यादा वृद्धि हो गई है। स्वच्छ जयपुर सुंदर जयपुर के सपने का धूमिल हो गया। अब तक इस प्रोजेक्ट पर 1442 करोड रुपए खर्च हो चुके हैं और यदि इसे पूरा नहीं किया गया तो उन 1442 करोड़ का कुछ भी फायदा नहीं मिलेगा। टाटा प्रोजेक्ट ने जेडीए पर 423 करोड़ का दवा भी किया है।

लगभग 1400 करोड रुपए व्यर्थ

यह सब हुआ मुझे इसमें बहुत ज्यादा आश्चर्य नहीं है पर इस बात का दुख है की यह सब नहीं होना चाहिए था। लगभग 1400 करोड रुपए का यू व्यर्थ हो जाना अपने आप में एक राष्ट्र, एक राज्य के लिए नकारात्मक पहलू है। हमारे देश में क्या नहीं है? अच्छा विजन है, अच्छी समझ है, अच्छी सोच है, अच्छे रिसोर्स है, सब कुछ है बस नहीं है तो सिर्फ राजनीतिक समझ।

कांग्रेस सरकार ने प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया

बीजेपी सरकार में वसुंधरा राजे ने यह सपनों से संजोया तो कांग्रेस सरकार ने आते ही इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया, बिना यह सोचे समझे कि इस पर लगने वाला पैसा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, किसी सरकार का नहीं बल्कि जनता से लिए गए टैक्स का है इस तरह किसी प्रोजेक्ट का खत्म होना देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाता है।

नदी में गंदे नालों का पानी ही बह रहा है

अब नदी में कहीं भी साफ पानी नहीं है बल्कि गंदे नालों का पानी ही बह रहा है। ऐसा पिछले एक साल से हो रहा है। द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट सरकारों की आपसी खींचतान और शहरी विकास की एजेंसियों की नाकामी का जीता-जागता नमूना बन गई है। पैसा जनता का है लेकिन जवाबदेही किसी की नहीं है।

द्रव्यवती नदी की वर्तमान स्थिति
द्रव्यवती नदी की वर्तमान स्थिति

जिस तरह किसी व्यक्ति विशेष के पॉल्यूशन के मामले में दोषी पाए जाने पर, जीएसटी और इनकम टैक्स में डिफॉल्टर पाए जाने पर सरकार उसकी व्यक्तिगत जवाबदारी तय करती है ठीक उसी प्रकार राष्ट्र को समर्पित योजनाओ में पैसों का दुरुपयोग होने पर सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि ईमानदारी से उन लोगों के जवाबदारी तय करनी चाहिए जो इसके कारक है तभी हम गर्व से कह पाएंगे – “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

પર્યાવરણ,paryavarantoday,paryavaran,पर्यावरण,What is this paryavaran?,पर्यावरण संरक्षण,Save Paryavaran Save Life,paryavaran news