प्रधानमंत्री ने कचरे को फेंकने के बजाय अच्छा उपयोग करने की प्रेरणा देकर एक नई इकोनॉमी का सृजन किया है: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
- आणंद में कचरे से बायोगैस बनाने के लिए 210 करोड़ रुपए के MOU
- अहमदाबाद में बायो सीएनजी और बायो फर्टलाइज़र प्लांट स्थापित करने के लिए 200 करोड़ के MOU
- वडोदरा में 125 करोड़ रुपये कि लागत से सीएनजी प्लांट स्थापित करने के लिए MOU
- सूरत में गंदे पानी को रिसाइकिल कर इंडस्ट्रीज़ को देने के लिए 230 करोड़ और 120 करोड़ रुपये के MOU
- सूरत में ग्रीन फंड इंश्योरेंस के भंडार के एकत्रीकरण के लिए 100 करोड़ रुपए के MOU
गांधीनगर: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वाइब्रेंट समिट की दसवीं कड़ी के तीसरे दिन आयोजित सेमिनार “सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से अवसर: अपशिष्ट-जल का पुनर्चक्रण और अपशिष्ट से ऊर्जा”(‘अपॉर्चुनिटीज थ्रू सर्कयूलर इकॉनोमी: रिसाइकलिंग वेस्ट वाटर एंड वेस्ट टू एनर्जी’) में मुख्य उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कचरे को फेंकने के बजाय अच्छा उपयोग करने की प्रेरणा देकर एक नई इकोनॉमी का सृजन किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई गोबरगैस और बायोगैस परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
मुख्यमंत्री ने सूरत को मिले स्वच्छ शहर अवॉर्ड के लिए बधाई देते हुए कहा कि राज्य में प्रत्येक शहर स्वच्छता में नंबर 1 बने ऐसा वातावरण हमें सृजित करना चाहिए। हमने प्रत्येक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कचरे का उचित प्रबंधन करके सर्कुलर इकोनॉमी बनाई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आगे कहा कि अगर हमारी इच्छा शक्ति हो तो हम टेक्नोलॉजी की मदद से बहुत सारे अच्छे काम कर सकते हैं। सूरत नगर प्राधिकरण द्वारा वेस्ट वॉटर को ट्रीट कर उद्योगों को देने से उसमें से 140 करोड़ के वार्षिक राजस्व की बचत, सर्कुलर इकोनॉमी का एक बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सेमिनार टेक्नॉलाजी सोल्यूशन के माध्यम से छोटे शहरों और गांवों के लिए भी कचरा निपटान का समाधान प्रदान करेगा। इस अवसर पर केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए शहरीकरण के साथ-साथ उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान लाना भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत, शहरी अमृत 2.0, नल से जल जैसे अभियानों के माध्यम से शहरीकरण की समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जा रहा है।
आज देश में उत्पन्न होने वाले कचरे से बायोगैस, बायो सीएनजी, हाइब्रिड ईंधन का उत्पादन किया जा रहा है। गुजरात ने कचरे से ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ‘वेस्ट टू एनर्जी’ नीति लागू की है और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
वर्ल्ड बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टो टानो कोमो ने कहा कि आज के समय कई ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें नष्ट नहीं किया जा सकता है उन्हें सिर्फ रिसाइकल-रियूज और रिस्टोर किया जा सकता है। सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य पृथ्वी पर उत्पन्न कचरे को रिसाइकल कर उसका पुन: उपयोग करना और मानव जाति के लिए एक स्थायी भविष्य का निर्माण करना है।
यदि विकासशील देश कूड़ा निकासी खर्च को कम कर उसे विकास कार्यों पर खर्च करेंगे, तो मानव जाति का सर्वांगीण विकास होगा और इस धरती पर गरीबी कम की जा सकेगी।
केन्द्रीय शहरी विकास विभाग की अपर सचिव डी. थारा ने कहा, कचरा निपटान की समस्या तब उत्पन्न होती है जब हम कचरे को जमा होने देते हैं। यदि हम कूड़ा एकत्रित होने वाले दिन ही उसके निपटान की व्यवस्था कर लें तो हम सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में प्रगति कर सकेंगे। इसके अलावा उन्होंने ‘जीरो वेस्ट सिटी पॉलिसी’ बनाने का सुझाव दिया।
इस सेमिनार में गुजरात के शहरी विकास और शहरी आवास विभाग के प्रधान सचिव अश्विनी कुमार ने कहा कि गुजरात के 48% नागरिक शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं, और निकट भविष्य में यह आबादी 60% तक पहुंच जाएगी। राज्य सरकार ने उस समय शहरों में सतत विकास के लिए अभी से ही कार्य योजना पर काम करना शुरू कर दिया है ।
इस सेमिनार में गुजरात के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव जे.पी. गुप्ता, गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट राजकुमार बेनीवाल, अहमदाबाद के नगर निगम आयुक्त एम. थेन्नारसन, सूरत की म्युनिसिपल कमिश्नर शालिनी अग्रवाल के साथ-साथ शहरी विकास से जुड़े महानुभाव-विशेषज्ञ और नागरिक उपस्थित रहे।