वायु एवं जल प्रदूषण को कम करने के उपाय सुझायेंगे दिग्गज

लखनऊ:  पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत देश के जानेमाने वैज्ञानिक और संस्थायें गुरुवार से यहां शुरु हो रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में ग्रीन केमिस्ट्री, वायु एवं जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम और संवेदनशील विषयों पर विचार विमर्श करेंगे और इन खतरों से निपटने के उपाय सुझायेंगे।

सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ एवं राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी (नेसा) के संयुक्त तत्वाधान में 14 से 16 दिसम्बर के बीच ग्रीन केमिस्ट्री, प्रदूषण रोकथाम एवं जलवायु परिवर्तन पर आधुनिक प्रवृत्तियों एवं चुनौतियों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मलेन आयोजन किया जा रहा हैं।

संस्थान के निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह सम्मेलन पर्यावरणीय प्रदुषण एवं जलवायु परिवर्तन को कम करने की उन्नत तकनीकियों के विकास पर केन्द्रित रहेगी। प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और हितधारकों द्वारा सतत विकास के लिये हरित प्रौद्योगिकियों को विकसित करने पर भी चर्चा की जाएगी।

संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं सम्मेलन के संयोजक डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि देश भर के 19 प्रदेशो के करीब 70 संस्थानों व विश्वविद्यालयों से 200 से ज्यादा प्रतिभागी सम्मेलन का हिस्सा बनेगे। सम्मेलन में मुख्य रूप से प्रदूषण एवं निस्तारण,जलवायु परिवर्तन, हरित रसायन विज्ञान, पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और समसामयिक मुद्दों पर वैज्ञानिक चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में 80 से ज्यादा मौखिक प्रस्तुतियां, 110 पोस्टर प्रस्तुतियां एवं देश के नामी विषय विशेषज्ञों द्वारा 13 मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किये जायेगे |

इसके अलावा सम्मेलन में दो विशेष सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा हैं जिनमे पहला तीसरा प्रो. सुशील कुमार स्मृति व्याख्यान एवं दूसरा भारत में पर्यावरण सेवा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर मंथन पर आधारित होंगे। सम्मेलन के तीसरे दिन संस्थान के वनस्पति उद्यान में एक पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया जायेगा। सम्मेलन का उदघाटन, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी करेंगे ।

वर्ष 1984 में स्थापित राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी आम लोगों में पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ सम्बंधित विषयक व्याख्यान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, संगोष्ठियां, सम्मेलन, पत्रिकाओं का प्रकाशन और अन्य गतिविधियों जैसे पर्यावरण संरक्षण के प्रयास आदि पर बहुमुखी कार्य कर रही है।

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