विकासशील देशों के जरूरत के अनुरूप जुटाएं धन: जलवायु सम्मेलन में भारत

दुबई: भारत ने यहां चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (कॉप28) में शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक वैश्विक लक्ष्यों के अंतर्गत संसाधन जुटाने के लक्ष्य विकसित देशों की जरूरतों और आवश्यकताओं के आधार पर तय होने चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन संबंधी कार्रवाई के संबंध में न्याय यही कहता है कि विकसित देश अपने लिए अधिक बड़ी और महत्वाकांक्षी भूमिका लें।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कॉप 28 में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा, “ऐसे अवसर पर जबकि हम हम यहां कॉप 28 के लिए दुबई में एकत्र हुए हैं, भारत वैश्विक आकलन के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहा है और आशा करता है कि (पिछले निर्णयों पर वैश्वि स्तार पर कार्यान्वयन की स्थिति के) ये आकलन जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध और बड़ी कार्रवाई के निर्णय लेने के लिए सार्थक और प्रासंगिक सूचना-सामग्री प्रदान करेंगे।”

यादव ने कहा, ‘‘नए आकलित सामूहिक-लक्ष्यों ’ के अंतर्गत संसाधन जुटाने संबंधी लक्ष्य विकासशील देशों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रख कर तय की होनी चाहिए।” भारत की ओर से कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक कार्रवाई साझेदारी और न्यायपूर्ण आधार पर होनी चाहिए और ऐसा तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब कि विकसित देश जलवायु संबंधी महत्वाकांक्षी कार्रवाई में आगे रहें।”

भारत की ओर से कार्बन उत्सर्जन की गहनता कम करने, बिजली उत्पादन क्षमता विस्तार में खनिज ईंधन के इतर स्रोत पर आधारित क्षमता का अनुपात बढ़ने जैसे लक्ष्यों को समय से बहुत पहले पूरा कर लेने तथा जलवायु कार्रवाई पर राष्ट्रीय स्तर पर घोषित प्रतिबधताओं को खुद बढाए जाने के साथ साथ अन्य राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय पहलों में अपनी सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया गया ।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के जवाब में वैश्विक स्तर पर कार्रवाई-उन्मुख कदमों का समर्थन करने में सबसे आगे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मिशन लाइफ़ – पर्यावरण के लिए जीवन शैली में शामिल होने के लिए वैश्विक समुदाय को दिया गया आह्वान भारत के कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण का प्रमाण है। मिशन लाइफ के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए, भारत ने नवीन पर्यावरण कार्यक्रमों और उपकरणों के आदान-प्रदान के लिए एक सहभागी वैश्विक मंच बनाने के लिए 01 दिसंबर को यहां कॉप 28 में ग्रीन क्रेडिट पहल शुरू की।

उन्होंने कहा कि जी20 की भारत की अध्यक्षता में नयी दिल्ली शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक हरित विकास समझौते को अपनाया गया। उन्होंने सम्मेलन को बताया कि भारत ने अब प्रारंभिक अनुकूलन सूचना एवं संदेश के साथ-साथ ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) की 1019 की इन्वेंट्री सूची के आधार पर अपने तीसरे राष्ट्रीय सूचना-संदेश को तय कर चुका है।

यादव ने कहा कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बढ़ाए बिना आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के अपने प्रयत्नों से भारत ने 2005 और 2019 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रति इकाई कार्बन उत्सर्जन की गहनता को एक तिहाई तक कम कर चुका है जबकि देश ने यह लक्ष्य 2030 तक हासिल करने की प्रतिबद्धता जतायी थी।

यादव ने इस तथ्य को भी रखांकित किया कि भारत ने अपनी विद्युत उत्पादन क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्सा खनिज ईंधन से इतर स्रोतों पर स्थापित करने का लक्ष्य 2030 तक पूरा करने की प्रतिबद्धता जतायी थी । इस लक्ष्य को उससे नौ साल पहले पूरा कर लिया है।

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि भारत ने 2017-23 के बीच लगभग एक लाख मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता जोड़ी जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर आधारित है।

यादव ने कहा, “इसलिए हमने जलवायु संबंधी अपनी राष्ट्रीय स्तर पर घोषित प्रतिबद्धताओं (एनडीसी) को स्वयं बढ़ा दिया है जो जलवायु कार्रवाई में वृद्धि के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई), लीडआईटी का निर्माण, लचीले द्वीप राज्यों के लिए बुनियादी ढांचे (आईआरआईएस) और बिग कैट एलायंस (बाघ संरक्षण गठबंधन) जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के माध्यम से जलवायु कार्रवाई में महत्वपूर्ण योगदान किया है ।

उन्होंने कहा कि इसी वर्ष जी20 के शिखर सम्मेलन के दौरान जैव ईंधन पर वैश्विक गठबंधन की पहल का उद्देश्य जैव ईंधन के विकास और व्यापक उपयोग के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने वाले एक उत्प्रेरक मंच के रूप में काम करना है।

यादव ने इस सम्मेलन की मेजबानी और आतिथ्य के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कॉप28 को ‘कार्रवाई के लिए कॉप’ के रूप में संचालित करने के लिए भी सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे यूएई को बधाई दी। उन्होंने कहा इस सम्मेलन के दौरान पहले ही दिन हानि और क्षति कोष के संचालन की व्यवस्था को स्वीकार किया जाना कार्रवाई इस सम्मेलन के उन्मुख सम्मेलन होने का प्रमाण है।

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