मानसिक रूप से कमजोर बच्चे बना रहे पर्यावरणमित्र मूर्तियां

महोबा:  उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में दर्जनों की संख्या में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे इस दीपावली आम जनमानस को सुख,समृद्धि और यश.कीर्ति का उपहार दे रहे हैं। प्लास्टर आफ पेरिस और अन्य हानिकारक तत्वों से इतर यह लोग गाय के गोबर और मिट्टी से निर्मित दीये, गणेश-लक्ष्मी व अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाओं को मूर्त रूप प्रदान कर लोगो को प्रदूषण रहित त्योहार मनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

बुंदेलखंड के महोबा में सामाजिक संस्था बुंदेलखंड सोसाइटी फार रूरल डेवलपमेंट का मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को हुनरबाज बनाने का प्रयास रंग ला रहा है। पर्यावरण प्रदूषण के खतरे के मद्देनजर लोगों को पारंपरिक संसाधनों व अपनी मिट्टी से जोड़ने के संस्था के प्रयास सार्थक हो रहे हैं। यही वजह है कि सोसाइटी द्वारा इन बालक.बालिकाओं को आवश्यक प्रशिक्षण देकर जिस प्रकार से हुनरबाज बनाया जा रहा है उसकी लोग तारीफ कर रहे है।

इस दीपावली के त्योहार में बाजार में इन बच्चों द्वारा गाय के गोबर व मिट्टी से निर्मित दीपक, गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं और अन्य कलाकृतियों की धूम मची है। पर्यावरण को लेकर थोड़े से भी जागरूक लोग बच्चों की पहल को न सिर्फ सराह रहे है बल्कि उनके द्वारा तैयार सामग्री को बगैर कोई मोलतोल के खरीद कर उनका उत्साहवर्धन कर रहे है।

सोसाइटी फार रूरल डेवलपमेंट के निदेशक आकाश राय कहते है कि छोटे बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते है। उन्हें शुरुआत से ही उचित दिशा देकर समर्थवान बनाया जा सकता है। यद्यपि मानसिक रूप से कमजोर इन बच्चों के साथ मेहनत कुछ अधिक करना पड़ती है किंतु खेल.खेल में किसी भी कार्य के लिए उनमें उत्सुकता जगाई जा सकती है। महोबा में स्थित सोसाइटी की शाखा में मौजूद कोई दो दर्जन ऐसे बालक एवम बालिकाओं ने इस दीपावली पर दीपक,देव प्रतिमाओं और कलाकृतियों के निर्माण में खास रुचि दिखाते हुए भारी मात्रा में सामग्री तैयार की है, जिसे बाजार में बिक्री के लिए एक स्थान पर सजा कर लगाया गया है। यह सभी सामग्री पर्यावरण के लिए पूर्णतया हानि रहित है। और तो और इनमे हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल किया गया है। बच्चों द्वारा इस सामग्री के तैयार होने की जानकारी मिलने पर ग्राहकों द्वारा इसमे खासी रुचि दिखाई जा रही है।

सामाजिक कार्यकत्री सरस्वती वर्मा ने इन बच्चों द्वारा दीपावली हेतु तैयार की गई सामग्री को काफी उत्कृष्ट बताते हुए इसकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इन कलाकृतियों की फिनिशिंग किन्ही फैक्ट्रियों में निर्मित सामग्री से तनिक भी कमजोर नहीं दिखती। इसके साथ ही पर्यावरण के संरक्षण में सहायक होने के चलते इनका महत्व और भी बढ़ गया है। श्रीमती वर्मा ने इन मानसिक दिव्यांगों को सशक्त बनाने में बुंदेलखंड सोसाइटी फार रूरल डेवलपमेन्ट के प्रयासों की काफी सराहना की और शासन से इस संस्था को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराए जाने की आवश्यकता जताई।

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