नौसेना को तीसरा विध्वंसक पोत ‘इम्फाल’ मिला

नयी दिल्ली: रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने प्रोजेक्ट 15 बी श्रेणी का निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत ‘इम्फाल’ शुक्रवार को नौसेना को सौंप दिया। एमडीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजीव सिंघल तथा नौसेना के रियर एडमिरल संजय साधु ने आज इससे संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये।

स्वदेशी स्टील से निर्मित इम्फाल देश के सबसे बड़े विध्वंसक युद्धपोतों में से एक है, जिसकी कुल लंबाई 164 मीटर है और विस्थापन 7500 टन से अधिक है। यह शक्तिशाली युद्धपोत समुद्री युद्ध में विभिन्न प्रकार के कार्यों और मिशनों को पूरा करने में सक्षम है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलों और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली ‘बराक-8’ मिसाइलों से लैस है। यह युद्धपोत समुद्र के भीतर युद्ध क्षमता के लिए विध्वंसक स्वदेशी रूप से विकसित पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसरों से सुसज्जित है जिनमें प्रमुख रूप से सोनार हम्सा एनजी, भारी वजन वाले टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर और पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं।

यह युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल विध्वंसकों और फ्रिगेट्स की पिछली श्रेणियों की तुलना में अधिक बहुआयामी है और इम्फाल की चौतरफा क्षमता इसे सहायक जहाजों के बिना स्वतंत्र रूप से संचालित करते हुए दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों, पोत रोधी मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के खिलाफ सक्षम बनाती है। साथ ही यह एक नौसेना टास्क फोर्स के तौर पर प्रमुख कार्य करने में भी सक्षम है।

इम्फाल को निर्धारित समय से चार महीने से अधिक समय पहले ही नौसेना को सौंपा गया है। इस युद्धपोत ने सभी समुद्री परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसमें महत्वपूर्ण हथियारों की गोलीबारी भी शामिल है। यह पी 15बी श्रेणी के जहाजों में पहला है जिसे ज़मीन पर हमले में सक्षम बनाने के साथ-साथ लंबी दूरी की दोहरी भूमिका तथा क्षमता वाली उन्नत ब्रह्मोस मिसाइलों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके अलावा, इम्फाल पहला नौसेना युद्धपोत है जिस पर महिला अधिकारी और नाविकों की तैनाती की जा सकती है।

इस युद्धपोत में 312 कार्मिकों का दल रह सकता है, इसकी क्षमता 4000 समुद्री मील है और यह युद्धपोत 42 दिन तक मिशन को अंजाम दे सकता है। युद्धपोत दो हेलीकॉप्टरों से भी सुसज्जित है।

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