सिंधिया ने इस्पात उद्योग में कार्बन उत्सर्जन घटाने के उपायों पर जोर दिया

नयी दिल्ली: केंद्रीय इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भारत में इस्पात उद्योग में कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने और हरित इस्पात के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया देश में को हरित इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने के लिए गठित कार्यबलों के साथ शुक्रवार को यहां चर्चा कर रहे थे। उनके पास नागरिक उड्डयन विभाग का दायित्व भी है। कल हुई इस बैठक में इसके लिए बनाए गए 13 कार्यबलों में से पांच के साथ सार्थक विचार-विमर्श किया।

इस्पात मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में श्री सिंधिया ने स्टील उद्योग के विविध परिदृश्य पर विचार करने वाले नीतिगत उपायों के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जनों को कम करने के समाधानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यबलों की बैठक में हरित स्टील उत्पादन के लिए वित्तपोषण विकल्पों पर चर्चा के अलावा उद्योग की बढ़ती कौशल मांगों को पूरा करने के लिए शैक्षिक संस्थानों के गठन और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। प्रक्रिया में परिवर्तन संबंधी कार्य बलचर्चा में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए लौह संयंत्रों में कोयला आधारित फीडस्टॉक के बजाय प्राकृतिक गैस और सिनगैस के उपयोग को प्रोत्साहन देने की जरूरत बतायी गयी।

बैठक में इस क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों, उद्योग विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने इस्पात उत्पादन प्रक्रिया को स्वस्थ और कार्बन मुक्त बनाने के भारत के दृष्टिकोण के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस्पात मंत्रालय के सचिवनागेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा, कार्यबलों के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

विज्ञप्ति के अनुसार भारतीय बैंक संघ के मुख्य कार्यकारी सुनील मेहता के नेतृत्व में वित्त मामले में टास्क फोर्स ने भारतीय इस्पात उद्योग में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए वित्तपोषण के विकल्पों पर मसुझाव दिए।

विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अनिरुद्ध कुमार के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा पारेषण कार्य बल ने इस्पात उद्योग में नवीकरणीय ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने हेतु प्रोत्साहन और उद्योगों को कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा सुविधाएं स्थापित करने जैसे उपायों को अपनाने संबंधी प्रस्तावों को प्रस्तुत किया।

सार्वजनिक नीति और कौशल विकास विशेषज्ञ सुनीता सांघी के नेतृत्व में कौशल विकास कार्य बल ने इस्पात उद्योग की जनशक्ति के कौशल संवर्धन और री-स्किलिंग जैसी क्षमताओं की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

सेल के स्वतंत्र निदेशक अशोक कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में ऊर्जा दक्षता कार्य बल ने एकीकृत इस्पात संयंत्रों और माध्यमिक इस्पात उद्योगों दोनों के लिए ऊर्जा दक्षता समाधान को बढ़ावा देने की सिफारिशें कीं।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तहत राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक डॉ. इंद्रनील चट्टोराज के नेतृत्व में प्रक्रिया पारेषण कार्यबल ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड लौह संयंत्रों में कोयला आधारित फीडस्टॉक की बजाय प्राकृतिक गैस और सिनगैस के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मंत्रालय ने देश में हरित इस्पात उत्पादन के लिए प्रारूप निर्धारित करने के लिए श्री सिंधिया के नेतृत्व में उद्योग, शिक्षा जगत, शोध संस्थानों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों, विभिन्न मंत्रालयों एवं अन्य हितधारकों को शामिल करते हुए कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने पर विचार-विमर्श और सिफारिश करने के लिए 13 टास्क फोर्स का गठन किया है।

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