सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में गुजरात सरकार के कामकाज की समग्र देश में चर्चा
गांधीनगर: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में गुजरात ने उत्कृष्ट कामकाज किया है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी, आईटी तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर कार्य हो रहा है। इसके कारण अहमदाबादवासियों को अब पिराणा के कूड़े के पहाड़ से राहत मिली है। अब तक अहमदाबाद महानगर पालिका (अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) द्वारा पिराणा डम्पिंग साइट पर 95 लाख मैट्रिक टन कूड़े को हटाया गया है, जिसके कारण 2200 करोड़ रुपए मूल्य की भूमि शीघ्र ही कूड़ामुक्त, ख़ाली और खुली हो जाएगी।
अहमदाबाद महानगर पालिका के घन कूड़ा प्रबंधन विभाग द्वारा वर्ष 2019 में पिराणा-बायो माइनिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। मार्च महीने में 300 टन प्रतिदिन की क्षमता वाली ट्रॉमेल मशीनें साइट पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हाल में पिराणा डम्पिंग साइट पर 300 टीपीडी (टन्स पर डे – टन्स प्रति दिवस) कैपेसिटी की 60 ट्रॉमेल मशीनें, 1000 टीपीडी कैपेसिटी की 11 ऑटोमैटेड सेग्रिगेशन मशीनें, 63 एस्केवेटर्स और 267 हायवा ट्रक ऑपरेशन में हैं। साइट पर प्रतिदिन दो शिफ़्टों में 29-30 हज़ार मैट्रिक टन कूड़े-कचरे की प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण) की जा रही है। पिराणा में 85 एकड़ भूमि क्षेत्र में कूड़े का पहाड़ है, जहाँ पिछले चार दशकों से शहर का 1 करोड़ 25 लाख मैट्रिक टन से अधिक कूड़ा एकत्र हुआ है। हाल में यहाँ 85 एकड़ में से 35 एकड़ भूमि से कूड़ा-कचरा साफ़ कर दिया गया है।
ट्रॉमेल मशीनें कूड़ा अलग करती हैं
रोड ट्रीट ट्रॉमेल मशीनें साइट पर कार्यरत हैं। इन मशीनों की मदद से कूड़े से मिट्टी, कपड़ा, प्लास्टिक, लोहा, लकड़ी आदि वस्तुओं का पृथक्करण (वर्गीकरण) किया जाता है। इन मशीनों की सहायता से कूड़े का बुरादा बना कर उसे खाद जैसा बना दिया जाता है।
कूड़े से निकलने वाली मिट्टी का धोलेरा तथा अन्य प्रोजेक्टों में उपयोग
पिराणा में कूड़े की निकासी में 70 प्रतिशत मिट्टी निकल रही है। इस मिट्टी का उपयोग धोलेरा प्रोजेक्ट के अंतर्गत निर्मित हो रहे हाईवे में हो रहा है। इसके अलावा, साबरमती रिवरफ़्रंट के फेज़-2 तथा साबरमती गांधी आश्रम के रिडेवलपमेंट कामकाज में भी पिराणा से प्राप्त मिट्टी भेजी जा रही है। यह मिट्टी उपलब्ध कराने से महानगर पालिका को आय भी हुई है।
पिराणा का कामकाज देश के लिए उत्कृष्ट उदाहरण
पिराणा साइट के कामकाज की देशभर में प्रशंसा हो रही है। हाल ही में केरल से आए प्रतिनिधियों ने भी इस साइट की मुलाक़ात ली थी। जिस स्तर पर कामकाज हो रहा है, उससे वे प्रभावित हुए। इससे पहले भी हैदराबाद, पुणे, फ़रीदाबाद, कोलकाता एवं कोयम्बटूर से प्रतिनिधि यहाँ आकर यहाँ का कामकाज देख चुके हैं।
बोपल-घुमा डम्प साइट की छह महीनों में सफ़ाई की गई
बोपल-घुमा डम्प साइट दस वर्ष से अस्तित्व में थी, जहाँ लगभग 2.5 लाख मैट्रिक टन कूड़ा एकत्र हुआ था। महानगर पालिका ने जुलाई-2020 में 1000 टन प्रतिदिन की पृथक्करण क्षमता वाली मशीनों के साथ यहाँ कामकाज शुरू किया था। इसके बाद छह महीनों में इस साइट की सफ़ाई कर 6 एकड़ भूमि कूड़ामुक्त कर खुली की गई है। अब यहाँ इकोलॉजिकल पार्क का निर्माण किया गया है, जिसका केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करकमलों से उद्घाटन हुआ था।