पटेल की अध्यक्षता में स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की बैठक

गांधीनगर: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में गांधीनगर में गुरुवार को स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्ड लाइफ की 22वीं बैठक आयोजित हुई।
मुख्यमंत्री पटेल ने वन विभाग को राज्य के अभयारण्य क्षेत्रों में शुरू किए गए तथा शुरू किए जाने वाले बड़े प्रोजेक्ट का एन्वायर्नमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट करने के सुझाव दिए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि वन्य अभयारण्य क्षेत्रों में रेलवे लाइन, अंडरग्राउंड पाइपलाइन, ऑप्टिकल फ़ाइबर नेटवर्क जैसे प्रोजेक्ट से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों पर अध्ययन होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आज गांधीनगर में आयोजित स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्ड लाइफ़ की 22वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए इन वन्य प्राणी क्षेत्रों में जहाँ घास या पेड़ न हों तथा ख़ुली ज़मीनें हों तो उसका सर्वेक्षण करने का प्रेरणदायी सुझाव भी दिया। बोर्ड की इस 22वीं बैठक में राज्य के गीर, जांबूघोडा, पूर्णा, जेसोर, नारायण सरोवर, कच्छ अभयारण्य सहित सभी अभयारण्यों में मौजूदा कच्चे रास्तों, नालों, पुलों-पुलियों को चौड़ा करने या उनकी मरम्मत करने, 66 केवी सब स्टेशन तथा बिजली लाइन और आईओसी की अंडरग्राउंड पाइपलाइन को बिछाने जैसे प्रस्तावों को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम-1972 की धारा 29 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए स्वीकृति दी गई।
वन मंत्री मुलूभाई बेरा तथा राज्य मंत्री मुकेश पटेल की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में इको-सेंसिटिव ज़ोन के दायरे में आने वाले कुछ नए प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तावों में बालाराम-अंबाजी अभयारण्य के इको-सेंसिटिव ज़ोन क्षेत्र में वन्य जीव दृष्टिकोण की अनुशंसा के साथ तारंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड नई ब्रॉडगेज रेल लाइन डालने का प्रस्ताव शामिल है। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ऐसे प्रस्ताव स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्ड लाइफ़ की अनुशंसा प्राप्त कर नेशनल बोर्ड फ़ॉर वाइल्ड लाइफ़ को भेजना होता है। बैठक में बताया गया कि वन विभाग अब इस प्रस्ताव को नेशनल बोर्ड को भेजेगा।
राज्य में संशोधित वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 का एक अप्रैल 2023 से क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) नित्यानंद श्रीवास्तव ने बैठक में प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि धारा 25-ए के अनुसार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास तथा पुनर्स्थापन अधिनिय-2013 में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता के अधिकार के अंतर्गत कार्यवाही करने के अधिकार ज़िला कलेक्टर को दिए गए हैं। इतना ही नहीं, बैठक में यह भी बताया गया कि धारा-33 के प्रावधानों के अंतर्गत चीफ़ वाइल्ड लाइफ़ वॉर्डन केन्द्र सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार उनके द्वारा मंज़ूर किए गए अभयारण्य मैनेजमेंट प्लान के अंतर्गत अभयारण्य का नियंत्रण, संचालन एवं रक्षण करेंगे।
बैठक में बताया गया कि जूनागढ ज़िले की मघरडी लघु सिंचाई योजना में जंगल की ज़मीन का उपयोग करने के लिए अधिग्रहित की गई प्रेमपरा की 38.23 हेक्टेयर भूमि को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम-1972 के अंतर्गत इस वर्ष प्रेमपरा अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया है। वन्य प्राणी संरक्षण एवं संवर्धन के अंतर्गत वन विभाग द्वारा सामान्य रूप से हर पाँच वर्ष में राज्य में वन्य प्राणियों की गणना की जाती है। बैठक में पिछली गणना के अनुसार डॉल्फिन, भालू, गिद्ध, शियार, लकड़बग्घा, हिरन तथा नीलगाय जैसे प्राणियों की संख्या में हुई वृद्धि का विवरण प्रस्तुत किया गया।
मुख्य सचिव राज कुमार ने स्टेट बोर्ड फ़ॉर वाइल्ड लाइफ़ की बैठक में हुई चर्चा में सहभागी होते हुए कहा कि अभयारण्य क्षेत्र में कंजर्वेशन (संरक्षण) के साथ डेवलपमेंट (विकास) का कॉन्सेप्ट अपना कर स्टडी तथा एसेसमेंट करने की आवश्यकता है। इस बैठक में विधायक तथा बोर्ड के सदस्य महेश कसवाला, मुख्यमंत्री के एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी पंकज जोशी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विकास सहाय, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार, हेड ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट फ़ोर्स एस. के. चतुर्वेदी, विभागों के सचिव, धनराज नथवाणी सहित बोर्ड के मानद् सदस्य और वरिष्ठ वन अधिकारी उपस्थित रहे।

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