हिमाचल में 43 साल बाद जुलाई में सर्वाधिक बारिश
शिमला: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन तो कहीं जानमाल की हानि होने का दौर जारी है। चंबा जिला के भटियात में उफनते नाले में आठ साल का एक बच्चा बह गया। करीब आधा किलोमीटर दूरी पर नाले में उसका शव मिला। वह मां के साथ गोशाला तक गया था। वापस आते हुए उसका पैर फिसला और नाले में जा गिरा।
उधर, मंडी के रिवालसर में एक गाड़ी मलबे में दब गई। इसमें सवार चार लोग मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचे।
प्रदेश में भारी बारिश से 43 साल बाद जुलाई में हुई सर्वाधिक बारिश हुई। जुलाई माह में प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में जमकर बारिश हुई है और जुलाई महीने में बारिश ने 40 सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इससे पहले 1980 में जुलाई महीने में 477 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी और उसके बाद अब 437 मिली मीटर बारिश जुलाई महीने में रिकॉर्ड की गई है।
लाहौल-स्पीति में ग्रांफू से काजा सड़क फोर बाई फोर वाहनों के लिए बहाल कर दिया गया है। वहीं, चंबा-होली मार्ग चोली के पास भूस्खलन होने से 14 घंटे बंद रहा। रविवार सुबह 1100 बजे बहाल हुआ।
उधर, कालका-शिमला नेशनल हाईवे पांच अभी भी बहाल नहीं हो पाया है। चक्कीमोड़ में ढहे हिस्से से सड़क को निकालने के प्रयास जारी हैं। अब यहां पर निचली ओर मिट्टी को गिराकर मैदान जैसा बनाया जा रहा है। जिस पर से अस्थायी सड़क बनाई जाएगी। दावा किया जा रहा है कि सोमवार दोपहर तक यहां से छोटे वाहनों को गुजारा जाएगा। मलाणा पावर प्रोजेक्ट-दो के ओवर फ्लो डैम के दो सप्ताह बाद भी गेट नहीं खुल पाए।
मंडी जिला में शनिवार रात को हुई भारी बारिश के चलते बल्ह क्षेत्र के रिवालसर के विकासनगर गांव में एक गाड़ी मलबे में दब गई। हालांकि गाड़ी में सवार चार लोग बाल-बाल बचे। इस क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन के चलते भारी नुकसान हुआ है। बारिश के चलते सरकाघाट, नाचन, सराज, सुंदरनगर और धर्मपुर में कुछ स्थानों पर भूस्खलन हुआ। मंडी में भी बारिश के चलते कुछ स्थानों पर मलबा सड़कों पर गिरा है। सरकाघाट के तहत पटड़ीघाट-गोभड़ता सड़क का डंगा डरने से धनेड़ गांव में एक घर की दीवार को क्षति पहुंची। मनाली में दोपहर बाद बारिश हुई, जबकि अन्य क्षेत्रों में बादल छाए रहे।
नेशनल हाईवे तीन मनाली-लेह मार्ग सभी प्रकार के वाहनों के लिए खुला रहा, जबकि ग्रांफू से काजा सड़क में सिर्फ फोर बाई फोर वाहनों को आवाजाही की अनुमति ही रही।
मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मॉनसून कमजोर पड़ गया था लेकिन अब फिर से मानसून सक्रिय होने से हमें सात से आठ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। चार अगस्त से प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में बारिश होने की संभावना है और इसको लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है इस दौरान कई हिस्सों में लैंडस्लाइड और नदियों के उफान पर रहने की भी संभावना है।
उन्होंने बताया कि जुलाई महीने में मानसून में काफी ज्यादा बारिश हुई है और कई सालों के रिकॉर्ड टूटे हैं। 1980 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 477 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी और इस साल जुलाई महीने में 437 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले 122 सालों के रिकॉर्ड में इस बार सातवीं बार सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।
गौरतलब है कि प्रदेश में इस बार मानसून ने जमकर कहर बरपाया है मॉनसून के दौरान काफी ज्यादा जानी और माली नुकसान हुआ है।
प्रदेश में अब तक 8000 करोड से ज्यादा का नुकसान की संभावना जताई गई है जबकि 197 लोगों की जान मॉनसून के दौरान जा चुकी है। इसके अलावा कई लोग बेघर भी हो चुके हैं।